इंटिग्रेशन के लिए ज़रूरी शर्तें

इंटिग्रेशन शुरू करने से पहले, इंटिग्रेशन का तरीका और QA चेकलिस्ट को डाउनलोड करें. इससे आपको Subscribe with Google (SwG) इंटिग्रेशन प्रोजेक्ट की प्रोसेस को पूरा करने में मदद मिलेगी. इस चेकलिस्ट में, SwG के सभी कॉम्पोनेंट और टास्क की जानकारी मौजूद होती है. SwG इंटिग्रेशन की प्रोसेस के दौरान, आप कभी भी इनसे रेफ़रंस ले सकते हैं.

खास जानकारी

SwG इंटिग्रेशन की प्रोसेस में ये कॉम्पोनेंट शामिल होते हैं. SwG सिस्टम के साथ इंटिग्रेशन के लिए, हर कॉम्पोनेंट का होना ज़रूरी होता है. हालांकि, कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि प्रकाशक को किसी खास कॉम्पोनेंट के इस्तेमाल की ज़रूरत न पड़े. कॉम्पोनेंट के ब्यौरे में, इन मामलों के बारे में जानकारी दी गई है.

  1. Google Play डेवलपर खाता: प्रकाशक को Google Play डेवलपर खाता बनाना होगा, किसी ऐप्लिकेशन को अपलोड करना होगा, और ऐप्लिकेशन को बिलिंग के लिए चालू करना होगा. प्रकाशक को यह ऐप्लिकेशन प्रोडक्शन के दौरान प्रकाशित करना होगा या प्रोडक्शन के लिए पहले से मौजूद ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल करना होगा.
  2. प्रकाशन का कॉन्फ़िगरेशन: कॉन्फ़िगरेशन के खास बिंदुओं को सेट अप करने के लिए, प्रकाशक को Google के उन प्रतिनिधियों के साथ काम करना होगा जो तकनीकी समस्याएं हल करते हैं. इन आइटम में, ज़रूरी एपीआई एंडपॉइंट के लिए यूआरएल, लोगो/ब्रैंडिंग एसेट, SKU का ब्यौरा, निजता नीति का यूआरएल, और ऐसी अन्य जानकारी शामिल होती है जिसकी ज़रूरत Google को इंटिग्रेशन सेट अप करने के लिए पड़ती है. इंटिग्रेट किए गए हर प्रकाशन के लिए, प्रकाशक को यह कॉन्फ़िगरेशन सेट करना होगा.
  3. पेज मार्कअप: प्रकाशक को लेख के सभी पेजों पर स्ट्रक्चर्ड डेटा जोड़ना होगा. इस डेटा में, एक प्रकाशन आईडी (प्रकाशन के कॉन्फ़िगरेशन में मौजूद आईडी से मेल खाने वाला) और सदस्यता का एक लेबल शामिल होता है. यह डेटा, एएमपी दस्तावेज़ों सहित, लेख के सभी पेजों पर मौजूद होना चाहिए.
  4. SwG.js क्लाइंट इंटिग्रेशन: प्रकाशक को अपने प्रकाशन की वेबसाइट में, Google javascript क्लाइंट को इंटिग्रेट करना होगा. प्रकाशक को लेख के ऐसे सभी पेजों पर Swg.js क्लाइंट लाइब्रेरी शामिल करनी होगी जहां paywall ट्रिगर किया जा सकता है. इसमें, वे लेख भी शामिल हैं जिन पर सर्वर-साइड का paywall लागू किया गया है. प्रकाशक को SwG.js getEntitlements फ़ंक्शन को भी कॉल करना होगा और उस फ़ंक्शन से मिलने वाले रिस्पॉन्स को सही तरीके से मैनेज करना होगा.

    एएमपी पेजों को उसी हद तक AMP-subscriptions-google के लिए कॉन्फ़िगर किया जाना चाहिए जिस हद तक प्रकाशक अपने पेजों के एएमपी वर्शन बनाता है और ये एएमपी पेज संभावित रूप से paywall को ट्रिगर करते हैं. इससे, SwG के उपयोगकर्ता की सदस्यताओं को किसी भी तरह से असर से बचाने में मदद मिलती है.

  5. Google News: अगर प्रकाशक ने Google News पर दिखने वाले अपने कॉन्टेंट के ऐक्सेस को paywall किया है, तो उसे अपने Google News कॉन्फ़िगरेशन को अपडेट करना होगा, ताकि इस कॉन्फ़िगरेशन को SwG के साथ इस्तेमाल किया जा सके. इसका मतलब है कि प्रकाशक Google News पर जो SKU बेचता है वे उसके उन प्रॉडक्ट पर ही काम करेंगे जिनका मालिकाना हक़ उसके पास है और जिन्हें वह मैनेज करता है. साथ ही, वह सदस्यताओं को अपने परचेज़ फ़्लो या किसी SwG परचेज़ फ़्लो के ज़रिए किसी दूसरे प्लैटफ़ॉर्म भी बेच सकता है. Google News, प्रकाशक को ऐसा करने की अनुमति देता है. साथ ही, इस तरह बेची जाने वाली सदस्यताओं को Google News पर पहचाना जा सकता है. प्रकाशक को AMP-subscriptions-google का इस्तेमाल करने के लिए, इन दस्तावेज़ों को उसी हद तक कॉन्फ़िगर करना होगा जिस हद तक वह Google News के संदर्भ में एएमपी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करना चाहता है. इससे, उपयोगकर्ता की सदस्यताओं को सही तरीके से पहचानने में मदद मिलती है.

  6. Android इंटिग्रेशन: अगर प्रकाशक किसी खास हद तक, वेब के मुकाबले Android पर SKU बेचता है या प्रकाशक के पास एक ही प्रकाशन के लिए कई ऐप्लिकेशन हैं, तो उसे सदस्यता की खरीदारी की जांच के लिए, अपने Android ऐप्लिकेशन को अपडेट करना होगा. साथ ही, Subscribe with Google प्रकाशक एपीआई को कॉल करके, सही तरीके से ऐक्सेस देना होगा.
  7. Google साइन इन: प्रकाशक को वेब, iOS ऐप्लिकेशन, और Android ऐप्लिकेशन के लिए, सभी लॉगिन पेजों पर 'Google साइन-इन' का विकल्प शामिल करना होगा.

    'Google साइन इन' वाले इस विकल्प को लागू करने के लिए, Subscribe with Google प्रकाशन एपीआई की जांच करनी होगी. इससे, यह पक्का किया जा सकेगा कि अगर किसी Google खाते में प्रकाशक से जुड़ी कोई सदस्यता पहले से मौजूद है, तो वह खाता, प्रकाशक की साइट पर, उपयोगकर्ता के मौजूदा खाते से जुड़ा हो. प्रकाशक की वेबसाइट पर, अगर Subscribe with Google प्रकाशन एपीआई यह बताता है कि उपयोगकर्ता के पास कोई ऐसी सदस्यता है जिसकी जानकारी प्रकाशक को नहीं है, तो प्रकाशक उन उपयोगकर्ताओं को सही तरीके से ऐक्सेस देगा जिन्हें वो जानता है. साथ ही, वह उन उपयोगकर्ताओं के लिए स्थगित खाता बनाने वाला फ़्लो लॉन्च करेगा जिन्हें वह नहीं जानता.

    अगर किसी प्रकाशक का वेब या मोबाइल ऐप्लिकेशन प्रॉडक्ट पूरी तरह से मुफ़्त सेवा उपलब्ध कराता है और उस प्रॉडक्ट के ऐक्सेस को paywall नहीं किया गया है, तो 'Google साइन-इन' ज़रूरी नहीं है. अपवाद वाले ऐसे मामले में 'Google साइन-इन' इंटिग्रेशन की ज़रूरत नहीं पड़ती या यह इंटिग्रेशन संभव नहीं होता जिसमें प्रकाशक यूज़र मैनेजमेंट सिस्टम का रखरखाव नहीं करता है. यानी कि अगर प्रकाशक उपयोगकर्ता से जुड़े लेन-देन को मैनेज करने के लिए पूरी तरह से Subscribe with Google पर निर्भर हो.

  8. खरीदारी के बाद खाता बनाने वाला हैंडलर: उपयोगकर्ता जैसे ही खरीदारी पूरी करें, प्रकाशकों को उनके लिए खाता ज़रूर बनाना चाहिए.

    वेब पर, प्रकाशक पास ऐसी सुविधा ज़रूर होनी चाहिए जिससे वह swg.js सदस्यता के इवेंट और सदस्यता का डेटा को प्रकाशक के इंफ़्रास्ट्रक्चर को लौटा सके. Google News पर और Android इन-ऐप बिलिंग के ज़रिए की जाने वाली खरीदारी के लिए, प्रकाशक को अपनी वेबसाइट पर, स्थगित खाता बनाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल swg.js के ज़रिए तब करना चाहिए, जब वे उपयोगकर्ता वेबसाइट पर आते हों.

    एएमपी खरीदारी के लिए, अगर कोई प्रकाशक एएमपी पर खरीदारी की प्रक्रिया लागू करता है, तो प्रकाशक को, प्रकाशक इंफ़्रास्ट्रक्चर में Play Cloud Pub/Sub इवेंट की सदस्यता लेनी होगी.

    Google की सदस्यता की स्थिति एपीआई से, सदस्यता का डेटा और उपयोगकर्ता की प्रोफ़ाइल की जानकारी मांगने के लिए, प्रकाशक को सदस्यता के इवेंट से मिले खरीदारी के डेटा का इस्तेमाल करना होगा. वह डेटा मिलने के बाद, Account Management API को इनमें से कोई एक काम करना होगा:

    1. उसे Google से मिली उपयोगकर्ता की प्रोफ़ाइल की जानकारी का इस्तेमाल करके, एक खाता बनाना होगा और उस खाते में सदस्यता को जोड़ना होगा
    2. उसे प्रकाशक की साइट पर पहले से मौजूद उपयोगकर्ता खाते में, Google उपयोगकर्ता के प्रोफ़ाइल की जानकारी और सदस्यता का डेटा जोड़ना होगा.

    ऐसे मामले में खरीदारी के बाद खाता बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती या खाता बनाना संभव नहीं होता जिसमें प्रकाशक किसी यूज़र मैनेजमेंट सिस्टम का रखरखाव नहीं करता है. यानी कि अगर प्रकाशक उपयोगकर्ता से जुड़े लेन-देन को मैनेज करने के लिए पूरी तरह से Subscribe with Google पर निर्भर हो.

  9. OAuth खाता जोड़ने का पेज: नीचे दी गई प्रोसेस को आसान बनाने के लिए, प्रकाशक को OAuth लॉगिन पेज बनाना होगा:

    1. प्रकाशक के मौजूदा उपयोगकर्ताओं की पुष्टि करना
    2. उपयोगकर्ता की सदस्यताओं की जांच करना
    3. उपयोगकर्ता के लिए ऐक्सेस टोकन बनाना
    4. ऐक्सेस टोकन को वापस रेफ़रिंग पेज पर रीडायरेक्ट करना और पास करना

    ऐसे मामले में OAuth खाता जोड़ने का पेज बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती या इसे बनाना संभव नहीं होता जिसमें प्रकाशक किसी यूज़र मैनेजमेंट सिस्टम का रखरखाव नहीं करता है. यानी कि अगर प्रकाशक उपयोगकर्ता से जुड़े लेन-देन को मैनेज करने के लिए पूरी तरह से Subscribe with Google पर निर्भर हो.

  10. एनटाइटलमेंट एपीआई: प्रकाशक को एक एनटाइटलमेंट एपीआई बनाना होगा जो प्रकाशक के OAuth खाता जोड़ने के फ़्लो से बनाए गए ऐक्सेस टोकन को स्वीकार करता हो और उपयोगकर्ता की सदस्यताओं के साथ जवाब देता हो. इन सदस्यताओं को उन लेबल के एक सेट के तौर पर दिखाया जाता है जिन्हें उपयोगकर्ता ऐक्सेस कर सकता है. हो सकता है कि इनके साथ, उस प्रॉडक्ट की जानकारी भी दिखे जिसे उपयोगकर्ता ने खरीदा है.

    ऐसे मामले में एनटाइटलमेंट एपीआई की ज़रूरत नहीं पड़ती या इसे बनाना संभव नहीं होता जिसमें प्रकाशक किसी यूज़र मैनेजमेंट सिस्टम का रखरखाव नहीं करता है. यानी कि अगर प्रकाशक उपयोगकर्ता से जुड़े लेन-देन को मैनेज करने के लिए पूरी तरह से Subscribe with Google पर निर्भर हो.

  11. ऑटो-लॉगिन की सूचना: अगर Google एनटाइटलमेंट एपीआई किसी ऐसे उपयोगकर्ता की सदस्यता दिखाता है जिसे प्रकाशक पहले से जानता है, लेकिन फ़िलहाल उपयोगकर्ता ने प्रकाशक के सिस्टम में लॉग इन नहीं किया है, तो हम प्रकाशक को यह सलाह देते हैं कि वह अपनी साइट पर मौजूद खाते में उपयोगकर्ता को ऑटोमैटिकली लॉगिन होने दे. उपयोगकर्ता को इस इवेंट के बारे में सूचना देने या उपयोगकर्ता से ऑटो-लॉगिन की कार्रवाई के लिए सहमति लेने के लिए, प्रकाशक swg.js ऑटो-लॉगिन फ़ंक्शन का इस्तेमाल कर सकता है.
  12. iOS इंटिग्रेशन: अगर प्रकाशक ने किसी iOS ऐप्लिकेशन में, Subscribe with Google SKU से जुड़े किसी कॉन्टेंट को paywall किया है, तो उसे पहले 'Google साइन-इन' का इस्तेमाल करना होगा. इसके बाद, प्रकाशक को यह देखना होगा कि सदस्यताओं के लिए बैकएंड मौजूद है या नहीं. Paywall किए गए कॉन्टेंट को ऐक्सेस करने की अनुमति सिर्फ़ तब दी जानी चाहिए, जब कोई बैकएंड मौजूद हो. कोई बैकएंड मौजूद न होने पर, प्रकाशक को सदस्यताओं की जांच के लिए, Subscribe with Google प्रकाशन एपीआई को कॉल करना होगा.
  13. सदस्यताएं सेव करें: प्रकाशक को ऐसे सभी परचेज़ फ़्लो के आखिर में 'सदस्यता सेव करें' सुविधा इंटिग्रेट करनी होगी जो Subscribe with Google से नहीं जुड़ी हैं. इससे, उपयोगकर्ताओं को अपना Google खाते जोड़ने का विकल्प मिल सकेगा.