बेवसाइट का अलग-अलग ब्राउज़र पर चलना

उपयोगकर्ता आम तौर पर ब्राउज़र का इस्तेमाल करके आपकी वेबसाइट देखते हैं. हर एक ब्राउज़र आपके वेबसाइट कोड को अपने तरीके से समझता है. इसका मतलब है कि आपकी वेबसाइट, अलग-अलग ब्राउज़र का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अलग-अलग तरह से दिख सकती है. आम तौर पर, आपको किसी ब्राउज़र के भरोसे नहीं रहना चाहिए. उदाहरण के लिए, बिना निर्देश दिए, ब्राउज़र पर भरोसा करना कि वह कॉन्टेंट के टाइप या एन्कोडिंग को ठीक तरह से पहचान लेगा. इसके अलावा, कुछ ऐसे तरीके हैं जिनकी मदद से आप यह पक्का कर सकते हैं कि आपकी साइट अजीब तरह से व्यवहार न करे.

अपनी साइट को ज़्यादा से ज़्यादा ब्राउज़र में टेस्ट करना

एक बार आप अपना वेब डिज़ाइन बना लें, तब आपको इस बात की समीक्षा करनी चाहिए कि अलग-अलग ब्राउज़र पर आपकी साइट कैसी दिखती है और किस तरह काम करती है. इससे, आप जान पाएंगे कि साइट पर आने वाले सभी लोगों को बढ़िया अनुभव मिल पा रहा है या नहीं. साइट डेवलपमेंट के दौरान ही, आपको जल्द से जल्द इस तरह की टेस्टिंग शुरू कर देनी चाहिए. अलग-अलग ब्राउज़र - और यहां तक कि उसी ब्राउज़र के अलग-अलग वर्शन - आपकी साइट को अलग-अलग तरीकों से देख सकते हैं. आपकी साइट को देखने के लिए किन ब्राउज़र का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है, यह जानने के लिए आप Google Analytics जैसी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं.

ऐसा एचटीएमएल कोड लिखना जो पढ़ने में आसान होने के साथ-साथ पूरी जानकारी देता हो

एचटीएमएल मान्य न होने पर भी, आपकी साइट कुछ ब्राउज़र में सही तरह से दिख सकती है. हालांकि, इससे यह पक्का नहीं होता कि आपकी साइट सभी मौजूदा ब्राउज़र या आने वाले समय में लॉन्च होने वाले ब्राउज़र में सही तरह से दिखेगी. सभी ब्राउज़र पर आपका पेज एक जैसा दिखे, यह पक्का करने का सबसे सही तरीका है कि अपने पेज को मान्य एचटीएमएल और सीएसएस का इस्तेमाल करके लिखें और फिर ज़्यादा से ज़्यादा ब्राउज़र पर उसे टेस्ट करें. पढ़ने में आसान और मान्य एचटीएमएल का इस्तेमाल एक अच्छी नीति है. साथ ही, सीएसएस का इस्तेमाल करके कॉन्टेंट को बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता है. इतना ही नहीं, पेज को तेज़ी से रेंडर और लोड करने में भी सीएसएस से मदद मिलती है. पुष्टि करने वाले टूल, जैसे कि W3 कंसोर्टियम के ऑनलाइन मुफ़्त में उपलब्ध, एचटीएमएल और सीएसएस की पुष्टि करने वाले प्रोग्राम, आपकी साइट की जांच करने में मदद करते हैं. साथ ही, एचटीएमएल टायडी जैसे टूल, फटाफट और आसानी से कोड को हटाने में आपकी मदद कर सकते हैं. (हम मान्य एचटीएमएल का इस्तेमाल करने का सुझाव देते हैं. हालांकि, अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो भी Google आपकी साइट को उसी तरह क्रॉल और इंडेक्स करेगा जैसे वह करता है.)

कैरेक्टर एन्कोडिंग के बारे में बताना

आपके पेज पर टेक्स्ट को रेंडर करने में ब्राउज़र की मदद करने के लिए, अपने दस्तावेज़ की एन्कोडिंग के बारे में हमेशा बताएं. यह एन्कोडिंग, दस्तावेज़ (या फ़्रेम) में सबसे ऊपर दिखनी चाहिए, क्योंकि कुछ ब्राउज़र उन charset को पहचान नहीं पाते जो दस्तावेज़ में काफ़ी नीचे दिखती हों. इसके अलावा, आपको यह पक्का करना चाहिए कि आपका वेब सर्वर अलग एचटीटीपी हेडर तो नहीं भेज रहा है. content-type: text/html; charset=ISO-8859-1 जैसा कोई हेडर, आपके पेज की हर charset को ओवरराइड कर देगा.

सुलभता पर विचार करें

ज़रूरी नहीं है कि सभी उपयोगकर्ताओं ने अपने ब्राउज़र में JavaScript को चालू कर रखा हो. इसके अलावा, हो सकता है कि ActiveX जैसी टेक्नोलॉजी हर ब्राउज़र में ठीक तरह से (या बिल्कुल भी) रेंडर न कर पाए. हमारा सुझाव है कि आप रिच मीडिया फ़ाइलों का इस्तेमाल करने के हमारे दिशा-निर्देशों का पालन करें. साथ ही, अपनी साइट को Lynx जैसे सिर्फ़ टेक्स्ट वाले किसी ब्राउज़र में टेस्ट करें. इसके अलावा, रिच मीडिया कॉन्टेंट और फ़ंक्शनलिटी के लिए सिर्फ़ टेक्स्ट वाले विकल्प देने से, सर्च इंजन के लिए आपकी साइट को क्रॉल और इंडेक्स करना ज़्यादा आसान हो जाएगा. साथ ही, ऐसे उपयोगकर्ता आपकी साइट का आसानी से इस्तेमाल कर पाएंगे जो स्क्रीनरीडर जैसी वैकल्पिक टेक्नोलॉजी की मदद लेते हैं.