साइट को नई जगह पर ले जाने का क्या मतलब होता है?

साइट का मालिक होने के नाते, हो सकता है कि आप कभी अपनी साइट को किसी दूसरे यूआरएल या अलग इन्फ़्रास्ट्रक्चर में ले जाना चाहें. इस पेज में ऐसी अलग-अलग स्थितियों के बारे में बताया गया है, जब साइट को दूसरी जगह ले जाया जाए. साथ ही, साइट को दूसरी जगह ले जाने की तैयारी करने, ले जाने का तरीका लागू करने, और पूरी प्रोसेस की निगरानी करने के बारे में भी बताया गया है.

इस दस्तावेज़ में बताया गया है कि साइट को फिर से डिज़ाइन करने का मतलब उसे दूसरी जगह ले जाना नहीं होता. फिर चाहे, उसमें अलग से कुछ और यूआरएल क्यों न जोड़े गए हों. साइट को दोबारा डिज़ाइन करने का मतलब, मौजूदा पेजों का लेआउट बदलना या नए कॉन्टेंट वाले पेज जोड़ना है. साइट को दूसरी जगह ले जाने का मतलब होता है, मौजूदा पेजों को दूसरी जगह ले जाना. इसके लिए, इनमें से किसी एक तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है:

अपनी साइट को मोबाइल और डेस्कटॉप, दोनों तरह के उपयोगकर्ताओं के हिसाब से तैयार करने के लिए, मोबाइल-फ़्रेंडली साइट डिज़ाइन करने वाली गाइड देखें.

ऐसे सुझाव जो साइट को नई जगह पर ले जाने के हर तरीके में मददगार साबित हो सकते हैं

  • अपनी साइट के हिसाब से देखें, अगर सही लगे, तो छोटे-छोटे चरणों में उसे एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाएं.
    हम शुरुआत में, साइट के किसी एक हिस्से को दूसरी जगह ले जाने का सुझाव देते हैं, ताकि ट्रैफ़िक और खोज को इंडेक्स करने पर होने वाले किसी असर की जांच की जा सके. उसके बाद, आप चाहें, तो पूरी साइट को एक साथ दूसरी जगह ले जाएं या अलग-अलग हिस्सों में ले जाएं. शुरुआती टेस्टिंग के लिए सेक्शन चुनते समय, साइट का ऐसा हिस्सा चुनें जिसमें कम बदलाव होते हों. इस पर अक्सर या अचानक होने वाले इवेंट का ज़्यादा असर न होता हो. ध्यान रखें कि साइट को दूसरी जगह ले जाने का असर देखने के लिए, उसके किसी एक सेक्शन को दूसरी जगह ले जाना, टेस्टिंग का अच्छा तरीका है. हालांकि, खोज के मामले में, यह ज़रूरी नहीं है कि यह सेक्शन पूरी साइट पर होने वाले असर के बारे में बता सके. आप एक साथ जितने ज़्यादा पेजों को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश करेंगे, आपको उतनी ही ज़्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. सावधानी से प्लानिंग करने पर समस्याएं कम हो सकती हैं.
  • अगर हो सके, तो अपनी साइट को ऐसे समय दूसरी जगह ले जाएं, जब ट्रैफ़िक कम होता है.
    आपकी साइट पर आने वाला ट्रैफ़िक, समय के हिसाब से कम-ज़्यादा हो सकता है या हफ़्ते के कुछ खास दिनों में कम हो सकता है. इसलिए, जब आपको ट्रैफ़िक में बार-बार गिरावट दिखे, तो साइट को उस दौरान दूसरी जगह ले जाना सही रहता है. इसका मतलब है कि साइट को दूसरी जगह ले जाने के दौरान, अगर कोई समस्या आती है, तो उसकी वजह से कुछ ही लोगों पर असर पड़ेगा. साथ ही, जब Googlebot आपकी साइट को क्रॉल करता है, तब आपके सर्वर के ज़्यादातर रिसॉर्स इसके लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
  • साइट को दूसरी जगह पर ले जाने के दौरान, उसकी रैंकिंग में थोड़ी देर के लिए उतार-चढ़ाव हो सकता है.
    आपकी साइट में अहम बदलाव होने के बाद, जब Google उसे फिर से क्रॉल या इंडेक्स करता है, तब आपको रैंकिंग में उतार-चढ़ाव दिख सकते हैं. सामान्य नियम के मुताबिक, मीडियम साइज़ की किसी वेबसाइट को अपने ज़्यादातर पेज हमारे इंडेक्स में ले जाने में, कुछ हफ़्ते लग सकते हैं. बड़ी साइटों को इससे ज़्यादा समय लग सकता है. Googlebot और हमारे सिस्टम, दूसरी जगह ले जाए गए यूआरएल कितनी तेज़ी से खोजते और प्रोसेस करते हैं, यह मोटे तौर पर आपके सर्वर की रफ़्तार और यूआरएल की संख्या पर निर्भर करता है. साइटमैप सबमिट करने से, खोजने की प्रोसेस तेज़ हो सकती है. साथ ही, अपनी साइट को एक साथ नहीं, बल्कि हिस्सों में दूसरी जगह ले जाना अच्छा रहता है.
  • Google Search Central पर सवाल पूछें.
    हमारे सहायता पेज पर, बहुत सी अच्छी सलाह मौजूद है. साथ ही, हमारे उपयोगकर्ता फ़ोरम में, इस बारे में बताया गया है कि कुछ खास मामलों में क्या कदम उठाने चाहिए. अगर आपके कोई और सवाल हैं, तो आपके पास एसईओ ऑफ़िस आवर्स के लाइव सेशन में Google Search एक्सपर्ट से सवाल पूछने का विकल्प भी है.
  • अगर आपको यूआरएल में बदलाव से जुड़ी कोई बात जाननी है, तो आपको A/B टेस्ट या ट्रायल रन के बारे में सोचना चाहिए.
    क्रॉल और इंडेक्स करने की प्रोसेस, बदलावों को अपना सके और ट्रैफ़िक पर नज़र रखी जा सके, इसके लिए कुछ हफ्तों के हिसाब से प्लान करें.